krishna chandra shastri thakur ji meet premanand : वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक कृष्ण चंद्र शास्त्री ‘ठाकुर जी’ प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे। दोनों संतों ने धर्म और अध्यात्म पर गहन चर्चा की। 1500 से अधिक भागवत कथा के ज्ञाता कृष्ण चंद्र शास्त्री ‘ठाकुर जी’ पहुंचे प्रेमानंद महाराज से मिलने वृंदावन की पावन भूमि एक बार फिर संत मिलन की साक्षी बनी, जब सुप्रसिद्ध कथावाचक कृष्ण चंद्र शास्त्री ‘ठाकुर जी’ प्रेमानंद महाराज से मिलने श्रीहित राधा केलि कुंज आश्रम पहुंचे। प्रेमानंद महाराज ने उनका स्नेहपूर्वक स्वागत किया और दोनों संतों के बीच धर्म, अध्यात्म और भक्ति मार्ग पर गहन चर्चा हुई।

krishna chandra shastri thakur ji meet premanand : स्थानीय श्रद्धालु ठाकुर जी को ‘भागवत भास्कर’ के नाम से जानते हैं, जिनका जीवन भक्ति, ज्ञान और सेवा का अद्भुत संगम है। 1 जुलाई 1960 को वृंदावन के पास लक्ष्मणपुरा गांव में जन्मे ठाकुर जी ने बचपन से ही आध्यात्मिक पथ पर अद्भुत रुचि दिखाई। उनके पिता पंडित राम शरण उपाध्याय और माता चंद्रावती देवी भागवत और गोसेवा के प्रति समर्पित थे, जबकि दादा भूपदेव उपाध्याय ने उन्हें रामायण और कृष्ण चरित की अमूल्य सीख दी।
कृष्ण चंद्र शास्त्री ‘ठाकुर जी’ कौन हैं?
krishna chandra shastri thakur ji meet premanand : अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ठाकुर जी को स्वामी रामानुजाचार्य महाराज का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने दर्शनशास्त्र और व्याकरण में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। मात्र 15 वर्ष की आयु में ठाकुर जी ने मुंबई में अपना पहला भागवत प्रवचन देकर सबको चकित कर दिया। तब से अब तक वे 1500 से अधिक श्रीमद्भागवत कथाएं कर चुके हैं और लाखों श्रोताओं को अध्यात्म की ओर प्रेरित किया है।
krishna chandra shastri thakur ji meet premanand : अपने आध्यात्मिक सफर में ठाकुर जी ने जगन्नाथ पुरी में स्वामी गरुड़ध्वजाचार्य महाराज से वैष्णव संप्रदाय की दीक्षा ग्रहण की। उनके गुरुजनों ने उन्हें प्रेमपूर्वक ‘ठाकुर जी’ नाम दिया, जबकि विद्वानों ने उनकी विद्वता को मान्यता देते हुए ‘भागवत भास्कर’ की उपाधि से सम्मानित किया।
जानिए कौन हैं कृष्ण चंद्र शास्त्री ‘ठाकुर जी
krishna chandra shastri thakur ji meet premanand : ठाकुर जी ने समाजसेवा और धर्मप्रचार के लिए ‘श्री कृष्ण प्रेम संस्थान’ की स्थापना की, जहाँ वेदों और भागवत की शिक्षा निःशुल्क दी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2003 में गोशाला की स्थापना कर गोसेवा को अपना जीवन मंत्र बना लिया। अब तक ठाकुर जी ने 961 से अधिक सप्ताहिक श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सम्पन्न किए हैं और देश-विदेश में रामायण, गीता और भागवत कथा के माध्यम से करोड़ों भक्तों के हृदय में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित की है।
krishna chandra shastri thakur ji meet premanand : आज भी उनकी कथा केवल एक प्रवचन नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव होती है — जहाँ श्रोता भक्ति, ज्ञान और प्रेम के महासागर में डूब जाते हैं।
